"आखिरी पड़ाव", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :
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कविता-आधुनिक युग की नारी हूँ मै
मैं आधुनिक युग की नारी हूँ, कमजोर नही हूँ मैं, सीमा को लांघना सीखा नही कभी, ऐसे संस्कार मुझे मिले नही, पहनती हूँ जीन्स टॉप भले ही, मगर बुजुर्गों का सम्मान करना सीखा है मैंने, को...
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